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शमशेरा भी फुस्स, क्याें खत्म हाे गया बालीवुड, दक्षिण सिनेमा का बढता दबदबा

Shamshera is also flop, Why Bollywood ended, the growing dominance of South cinema

Shamshera is also flop : शमशेरा काे लेकर काफी हाइप मचा हुआ था। लेकिन इसका भी हाल बांकी हिंदी फिल्माें जैसा ही हुआ। रणवीर कपूर करीब चार साल बाद वापसी कर रहे थे। इसीलिए लाेगाें काे इस फिल्म से काफी उम्मीद थी। फिल्मों के बारे में आज बहस का प्रमुख मुद्दा बॉलीवुड की घटती लोकप्रियता और दक्षिण सिनेमा का बढ़ता वर्चस्व है .

आज सोशल मीडिया से लेकर चाय के दुकानों तक में यह चर्चा आम हो चली है कि बॉलीवुड में अब दर्शक खींचने की ताकत नहीं रही| एक समय था जब दक्षिण के कलाकार भी बॉलीवुड में काम करने को तरसते थे, क्योंकि संपूर्ण भारत में एक कलाकार के तौर पर स्थापित होने का यही एकमात्र रास्ता था. सुपरस्टार रजनीकांत तक ने बॉलीवुड में अपनी किस्मत आजमानी चाही थी, लेकिन वह यहां उतने सफल नहीं हो सके. खैर अब यह उल्टा हो चुका है फिल्म और कंटेंट का पावर हब दक्षिण सिनेमा बनता जा रहा है| इसकी बानगी आप आरआरआर जैसी फिल्मों में देख सकते हैं, जहां आलिया भट्ट और अजय देवगन जैसे कलाकार छोटे रोल निभाकर संतुष्ट नजर आए.

Shamshera is also flop
Shamshera is also flop

आखिर क्या वजह है दक्षिण सिनेमा के परचम लहराने का

कंटेंट में नयापन – 
दक्षिण सिनेमा के कंटेंट में भारी बदलाव आया है| अब वहां की कहानियां किसी आईएएस या आईपीएस तक सीमित नहीं रही है| कहानी के साथ कई प्रयोग किए गए हैं| दृश्यम जैसी फिल्म की कहानी में काफी नयापन और यूनीकनेस था और फिल्म काफी सफल रहीण् इसी फिल्म का हिंदी रीमेक भी काफी हिट रहा।

दमदार एक्शन – दक्षिण सिनेमा हमेशा से एक्शन के लिए जाना जाता रहा है | हालांकि निर्माता अब एक्शन दृश्यों को लेकर काफी सजग हो गए है और विदेशों की टेक्नोलॉजी, वीएफएक्स का प्रयोग करते हैं, ताकि एक्शन  दृश्य  रियल लगें।

कलाकारों का  आम आदमी की तरह लुक होना- दक्षिण सिनेमा में कलाकार आम आदमी जैसे काफी रियल लगते हैं, जिससे लोग इन कलाकारों से सीधे कनेक्ट कर पाते हैं। पुष्पा जैसी फिल्में इसी का उदाहरण हैं। इन फिल्मों के कलाकार बिलकुल आम आदमी की तरह दिखते हैं और लोग खुद को इन कलाकारों से जोड़ पाते हैं। इसके विपरीत बॉलीवुड में कलाकारों को आज भी राजकुमार जैसा दिखाने का चलन हैं। लोग इन चेहरों से ऊब चुके हैं|

बॉलीवुड की तुलना में नेपोटिज्म कम – दक्षिण सिनेमा में एक दो कलाकारों को छोड दें तो नेपोटिज्म यानि किसी बडे कलाकारों की संतान की संख्या काफी कम है| केजीएफ के यश जैसे कलाकार काफी सामान्य जगहों से आए हैं और सिर्फ मेहनत की बल से यह मुकाम हासिल किया है और कम ही समय में बेहद लोकप्रिय हो गए हैं।

कलाकारों से लेकर डायरेक्टर का समर्पण-. बाहुबली 1 और 2 इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैण् यहां कलाकार प्रभास और राजामौली की जोड़ी ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया| फिल्म ने कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए| यह फिल्म के क्रू मेंबर समेत प्रभास और राजामौली की मेहनत की वजह से ही संभव हुआ| मसलन समर्पण की वजह से फिल्म ने जादू क्रिएट किया|

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