Masik Krishnashtami 2022: मासिक कृष्णाष्टमी आज, व्रत की विधि, महात्म्य के बारे में जानिए

Masik Krishnashtami 2022: Monthly Krishnashtami today, know about fasting method, greatness

Masik Krishnashtami 2022: प्रत्येक मास की अष्टमी तिथि को कृष्णाष्टमी के नाम से जाना जाता हैं। मासिक कृष्णाष्टमी व्रत करने से पापो तथा भय का नाश होता है। यह व्रत सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करने वाला व्रत हैं। इस व्रत में बारह महीने भगवान शिव का पूजन करना चाहिये। इस मासिक कृष्णाष्टमी व्रत को जो व्रती श्रद्धापूर्वक लगातार एक साल तक करता हैं। वह सभी कष्टों से मुक्त होकर धन धान्य से परिपूर्ण होकर उत्तम एश्वर्य (Masik Krishnashtami 2022) को प्राप्त करता हैं । जो इस व्रत के महात्म्य को सुनता हैं उसे अतुल्य वैभव की प्राप्ति होती हैं।

मासिक कृष्णाष्टमी व्रत विधि (Masik Krishnashtami 2022)

– मार्गशीर्ष मास की अष्टमी तिथि श्रद्धा पूर्वक व्रत का नियम ग्रहण करना चाहिए।

– प्रातकाल स्नानादि से निर्वत होकर गंध , पुष्प , धुप , दीप , नेवेध्य , ताम्बुल [ पान ] आदि सामग्री से शिवलिंग का पूजन करना चाहिए ।

– पूजन के पश्चात काले तिल से हवन करना चाहिए।

– गोमूत्र पीकर भूमि पर सोना चाहिए।

– ब्राह्मणों को भोजन करवाकर यथा शक्ति दान दक्षिणा देना चाहिए।

– इस मासिक कृष्णाष्टमी का बारह महीने श्रद्धापूर्वक व्रत करने से सभी मनोकामनाये पूर्ण हो जाती हैं।

मासिक कृष्णाष्टमी व्रत की विशेताये (Masik Krishnashtami 2022)

– मार्गशीर्ष मास में तीर्थ स्थान या नदी , तालाब में स्नान कर शिवलिंग का विधि पूर्वक पूजन कर गोमूत्र का पान कर भूमि पर शयन करना चाहिए।

– पौष मास की कृष्णाष्टमी को शम्भु नाम से महेश्वर का पूजन कर घी का पान [ पीना ] करना चाहिए ।

– माघ मास की कृष्णाष्टमी को महेश्वर नाम से भगवान शंकर का पूजन कर गाय के दूध का पान करना चाहिए ।

– फाल्गुन मास की कृष्णाष्टमी को महादेव नाम से भगवान शिव का पूजन कर तिल खाना चाहिए ।

– चेत्र मास की कृष्णाष्टमी को स्थाणु नाम से पूजन करना चाहिए तथा शुद्ध सात्विक भोजन करना चाहिए ।

– बैशाख मास की कृष्णाष्टमी को शिव नाम से शिवजी का पूजन कर कुशोदक पान करना चाहिए ।

– ज्येष्ठ मास की कृष्णाष्टमी को पशुपति नाम से शिवजी का पूजन कर गोमूत्र का पान करना चाहिए ।

– आषाढ़ मास की कृष्णाष्टमी को उग्र नाम से भगवान शंकर का पूजन कर गोमय – प्राशन [ गाय के दूध से बने ] करना चाहिए ।

– श्रावण मास की कृष्णाष्टमी को शर्व नाम से भगवान शंकर का पूजन कर अर्क प्राशन करना चाहिए ।

– भाद्रपद मास की कृष्णाष्टमी को त्र्यम्बक नाम से भगवान शिव का पूजन कर बिल पत्र का सेवन करना चाहिए ।

-आश्विन मास की कृष्णाष्टमी को भव नाम से भगवान शंकर पूजन कर चावल खाना चाहिए ।

– कार्तिक मास की कृष्णाष्टमी को रूद्र नाम से भगवान शंकर का पूजन कर रात्रि में दही का पान करना चाहिए ।Read More..

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