विदेशी बाज़ार में चमक बिखेरेंगे झारखंड के उत्पाद

दुमका। झारखंड की उप राजधानी दुमका के खजूर के पत्तों से बने सजावटी सामान और अन्य उत्पाद अब जल्द ही विदेशी बाजारों में दिखाई देंगे। प्राकृतिक फाइबर के उत्पाद का विदेश में बाज़ार खोजने वाला झारखंड पहला राज्य है।

लहांटी इंस्टीट्यूट ऑफ मल्टीपल स्किल्स (लिम्स) ने खजूर के पत्तों से बने उत्पादों के नमूने विदेश भेजे हैं। इंग्लैंड, कनाडा और सऊदी अरब जैसे देशों ने इन उत्पादों को अपने बाज़ार में लाने पर सहमति दे दी है।

लॉकडाउन पूरी तरह से समाप्त होते ही खजूर के पत्तों से बने सजावटी सामान, फ़ाइल समेत कई अन्य उत्पाद इन देशों को निर्यात किया जायेगा।

हरित अर्थव्यवस्था से आदिवासी महिलायें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी। खजूर के पत्तों से उत्पाद तैयार करने में इन्हें जन्मजात महारत हासिल होता है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिये जिला प्रशासन के सहयोग से 60 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले चरण की की योजना 300 महिलाओं को खजूर के पत्ते से उत्पाद बनाने के लिए प्रशिक्षित करने की है। इसके तहत उन्हें उत्पाद का डिज़ाइन बताया जायेगा।

दुमका में खजूर के पेड़ों की कोई कमी नहीं है। आदिवासी महिलायें पहले से खजूर के पत्ते की चटाई बनाती रही है। उन्हें बाजार के मांग के अनुरूप उत्पाद बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार के लायक उत्पाद अब बनने लगे हैं।

गौरतलब है कि पूरे विश्व में खजूर के पत्तों से बने उत्पाद अभी सिर्फ तुर्की और लीबिया में तैयार हो रहे हैं। भारत तीसरा देश है जो अब इस तरह के प्राकृतिक फाइबर के उत्पाद तैयार करेगा।

वर्तमान समय में प्राकृतिक फाइबर से बनी सामग्री को दुनिया भर में तरजीह दी जा रही है। पर्यावरण संरक्षण और मानव की सेहत की दृष्टि से खजूर के पत्तों से बने उत्पाद की मांग और बढ़ेगी।

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