पिता के निधन के बाद चिराग के सामने लोजपा को आगे ले जाने की चुनौती

सागर चौहान
पटना। बिहार की राजनीति के कद्दावर दलित नेता रामविलास पासवान का गुरुवार शाम निधन हो गया, उनका निधन ऐसे समय हुआ जब बिहार में चुनाव है और उनके बेटे चिराग पासवान और उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) दोनों का भविष्य दांव पर लगा है।

रामविलास पासवान द्वारा LJP कि स्थापना 2000 में कि गयी थी, पिछले कई चुनाव बीजेपी, JDU, और LJP ने मिलकर लड़े और जीत भी हासिल की। लेकिन इस बार चिराग पासवान के नेतृत्व में LJP ,बीजेपी से वफादारी निभाते हुए साथ देगी, लेकिन नीतीश कुमार की JDU के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतार रही है |

अगर रामविलास जी स्वस्थ होते तो शायद ऐसा ना होने देते, रामविलास जी के बाद बिहार का चुनावी समीकरण बदल गया है।

चुनाव भी तीन चरणों में होने है। पहले 28 अक्टूबर, दूसरे 3 नवंबर, तीसरे 7 नवंबर को है और 10 को नतीजे घोषित होने है|

ऐसा कहा जा सकता है कि पिता के निधन का असर बेटे पर हुआ है इसलिए चिराग पासवान अब दूसरे और तीसरे चरण में अपने ज्यादा उम्मीदवार उतारने के इच्छुक नहीं है, 28 अक्टूबर को पहले दौर के लिए 42 उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए, उन्होंने उन सभी सीटों से परहेज किया, जहां भाजपा चुनाव लड़ रही है। लेकिन उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है।

इस सब के बीच बीजेपी, JDU और LJP कि सुलह करवाने कि पूरी कोशिश की है बीजेपी अध्यक्ष जे.पी नड्डा ने। जब चिराग पासवान से इनसब के बारे में पूछा गया तो, चिराग ने एक पत्र लिख अपना पलड़ा झाड़ा ।

अब इस सब बीच बिहार के चुनाव और भी रंगीन होते नज़र आ रहे हैं। लोगो के पेट में बुलबुले है कि किसकी सरकार बनती नज़र आ रही है| इस बार वैसे भी अब कोई राजनीति का वैज्ञानिक अंदाजा नहीं लगा सकता।

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