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बैक्टीरिया और वायरस से होने वाली बीमारियों का सीधा संबंध पर्यावरण के प्रदुषण से

Diseases caused by bacteria and viruses are directly related to environmental pollution

विनोद कुमार
नई दिल्ली. पूरा विश्व लगभग डेढ़ वर्ष से कोरोना महामारी से त्रस्त है. सतर्कता और टीकाकरण से संक्रमण की रोकथाम के प्रयास जोरों पर है. ऐसे समय में हमें दीर्घकालिक नीतियों को अपनाकर ऐसी महामारियों से मानव समाज को सुरक्षित रखने के ठोस उपायों पर ध्यान देने की जरुरत है.

बैक्टीरिया और वायरस से होने वाली बीमारियों का सीधा संबंध पर्यावरण के प्रदुषण से है.पर्यावरण शोधकर्तायों के अनुसार कोरोना महामारी प्राकृतिक क्षेत्रों के क्षरण, प्रजातियों के लुप्त होने और संसाधनों के अत्यधिक दोहन का परिणाम है.

Pollution

ऐसे समय में विभिन्न देशों को पारिस्थितिकी के क्षरण को रोकने और अब तक हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करनी चाहिए. पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदुषण और जैव विविधता के पतन के दुष्परिणाम को भुगत रही है. भारत को भी इस क्षेत्र में सकारात्मक कदम उठाने चाहिए.

महामारी में चिकित्सकों ने पाया कि प्रदुषण के प्रभाव से संक्रमण अधिक ख़तरनाक रूप धारण कर रहा है. धरती के तापमान में वृद्धि होने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और उनका पानी समुद्री जलस्तर बढ़ने का कारण बन रहा है. कई शोधों में यह बताया गया है कि इन ग्लेशियरों में लाखों साल से दबे बैक्टीरिया और वायरस बाहर आ रहे हैं और जीव जंतुओं के माध्यम से मनुष्य तक पहुंच रहे हैं.

शोधकर्ता यह भी बता चुके हैं कि को वायरसों कि संरचना कुछ दिनों में बदल सकती है. कोरोना वायरस के रूप बदलने के कई उदाहरण हमारे सामने हैं. नये नये आकार में यह वायरस अधिक आक्रामक और ख़तरनाक होते जा रहे हैं. जैव विविधता के क्षरण और अंधाधुंध विकास के कारण लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है. खाने पीने कि चीज़ों कि उपलब्धता और गुणवत्ता और उनकी विविधता भी पर्यावरण से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है.

स्वाथ्य कि बेहतरी और जीवन शैली में सुधार सतत विकास कि अवधारणा के अभिन्न अंग हैं. यदि हमारे जीवन जीने का तरीका प्रकृति के साथ सामंजस्य कि समझ से जुड़ा होगा, तो बर्बादी भी कम होंगी और कचरे कि समस्या भी नही आयेगी.

उल्लेखनीय है कि कूड़े कचरे कि समुचित प्रबंधन के अभाव में प्रदुषण कि चुनौती गंभीर होती जा रही है. विभिन्न जानलेवा संक्रामक रोगों कि जड़ में प्रदुषण है. प्राकृतिक संसाधनों के बेलगाम दोहन ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर पानी फेर दिया है. जो नुकसान हो चुका है, उसे पूरा कर पाना लगभ असंभव है, इसलिये संरक्षण हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. यदि हम अभी भी सावधान नहीं हुए, तो बीमारियों और महामारी से भी पार पाना बेहद मुश्किल होगा. यह एक तथ्य है कि कोरोना महामारी अंतिम महामारी नहीं है. इसलिये हमें अभी से ही आगे के लिये सावधानी से तैयारी करनी होंगी.

(लेखक देश के सर्वश्रेष्ठ जनसंचार संस्थान IIMC के पूर्व छात्र हैं)

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