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बिहार चुनाव : स्थानीय उम्मीदवार क्यों है जरूरी?

कटिहार। सोचिये आपने कोई फसल बोया हो, उसकी देखभाल की हो, उसे पाला पोसा हो, फिर जब कटनी का टाइम आए तो कोई बाहरी आदमी आकर उसे निर्ममता से काट ले जाए, तो आपकी हालत क्या होगी। ठीक वही स्थिति उस क्षेत्र के नेता-कार्यकर्ता की हो जाती है, जो साल भर किसी अमुख पार्टी के लिए मेहनत करता है, लोगों के पास जाता है, किसी उम्मीद से उस पार्टी के लिए काम करता है, लेकिन चुनाव आते ही टिकट किसी बाहरी उम्मीदवार यानी पैराशूट कैंडिडेट को दे दिया जाता है।

पार्टी टिकट बंटवारे में कई फैक्टर्स को ध्यान में रखती है। मसलन जनता के बीच उस उम्मीदवार की पकड़, उसका पार्टी के लिए योगदान और जीत प्रतिशत काफी मायने रखता है। लेकिन कई बार इनसब चीज़ों को ताक पर रख दिया जाता है और बेड़ा गर्क जनता का हो जाता है।

खैर, जनता के लिए विकास सबसे जरूरी होता है। उसे उम्मीद होती है कि चुनाव बाद जब उसका नेता चुना जाएगा तो वह क्षेत्र के रुके कामों को करवाएगा, लेकिन जब बाहरी उम्मीदवार जीत जाता है तो उसे उस क्षेत्र की दिक्कतों का पता नहीं होता और न ही वहां की जनता से जुड़ाव होता है, ऐसे में वह सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने में लगा रहता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर काम सिफर ही होते हैं। अब अपवाद स्वरूप कई उदाहरण है, जहां पैराशूट कैंडिडेट ने अच्छा काम किया है। लेकिन यह सिर्फ अपवाद है।

अब बात करें, उस क्षेत्र के उन नेता-कार्यकर्ताओं की जो बरसो मेहनत इसी आस में करते हैं कि उसे या उसके किसी जानने वाले नेता को ही टिकट मिलेगा, लेकिन होता इसके ठीक उलट है। इससे उस नेता-कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फिर जाता है, उसके पास चाह कर भी केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय को मानने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचता।

कई बार गठबंधन की राजनीति स्थानीय उम्मीदवारों के चयन में रोड़ा अटका देती है। मसलन किसी क्षेत्र में भाजपा की अच्छी पकड़ है, लेकिन गठबंधन धर्म की मज़बूरी की वजह से वह सीट किसी अन्य दल को चली जाती है, इससे उस क्षेत्र का पूरा समीकरण ही बदल जाता है और इसी मौके का फायदा कोई अन्य पार्टी उठा लेती है। कई बार तो उस अमुख पार्टी के कट्टर समर्थक भी खीज की वजह से किसी अन्य पार्टी का समर्थन कर देते हैं।

बहरहाल, ये राजनीति है और इसकी बिसात हमेशा टेढ़ी होती है। बाहर से कई चीजें आपको सीधी लग सकती है, लेकिन भीतरखाने इतनी उठापटक होती है कि रातोंरात सारे समीकरण बदल जाते हैं।

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