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सारंडा जंगल में होगी पक्षियों की गिनती, पक्षी अभ्यारण्य तैयार करने की योजना

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिला स्थित विश्व प्रसिद्ध सारंडा जंगल में सौ साल बाद पक्षियों की गणना की जायेगी ताकि इनकी प्रजातियों और इनकी उपलब्धता के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त हो सके।

वन विभाग के अनुसार सारंडा जंगल को पक्षियों के अभ्यारण्य के तौर पर विकसित करने की योजना है। पक्षियों की गणना करने के बाद इस योजना को धरातल पर उतारने में आसानी होगी। लगभग 700 पहाड़ियों वाले सारंडा जंगल में जंगली जीव जंतुओं के अलावा पक्षियों की 200 से भी अधिक दुर्लभ प्रजातियां मौजूद है।

गिद्ध और ओपन चोच सारस के अलावा सारस की 25 प्रजातियां भी यहाँ पाई जाती है। इसके अलावा छह प्रकार की बुलबुल, आठ प्रकार की मैना भी है। कई तरह के तोते, मोर, कठफोड़वा, छोटी चोच वाली चील, किंगफिशर, तीतर, कोयल, नाईट हॉक, उल्लू, जंगली गौरैया समेत पक्षियों की अन्य प्रजातियां भी यहां पाई जाती है।

सर्दियों में यहां बड़ी संख्या में साइबेरियन क्रेन भी पहुँचते हैं। इनकी किसी तरह की कोई गणना नहीं होने के कारण पक्षियों का यह संसार विश्व फलक पर उभर कर सामने नहीं आ पा रहा है।

गौरतलब है कि सारंडा जंगल में सौ साल पहले पक्षियों का भी सर्वे होता था, लेकिन बाद में किन्हीं कारणों से यह काम रोक दिया गया था।

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