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मकर संक्रांति क्यों और किसलिए मनाते हैं, जानिए यहां

मकर संक्रांति क्यों और किसलिए मनाते हैं, जानिए यहां

मकर सक्रांति का खास महत्व-

मकर संक्रांति क्यों और किसलिए मनाते हैं, जानिए यहां। मकर सक्रांति यानी स्नान-दान का त्यौहार। इस दिन भगवान सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में शिफ्ट होने लगते हैं।  हालांकि मकर सक्रांति का त्यौहार नई फसल के आगमन से जोड़ा जाता है। मकर सक्रांति के दिन स्नान ध्यान और दान का खास महत्व है। जिसके बाद लोग घरों व मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर भगवान को मूरही व चुडा का लाई, तिल, तिलकुट और दही अर्पित करते हैं। धूमधाम से मनाया जाने वाला यह त्योहार इस साल कोविड-19 की वजह से कुछ फीका रहने वाला है। ज्यादातर लोग आज के दिन अपने अपने घरों पर ही रहने वाले हैं। खुशी व उल्लास का त्यौहार इस साल कुछ शांत सा दिखने वाला है।

मकर संक्रांति

मकर सक्रांति का खास महत्व

मकर संक्रांति का त्योहार खासकर किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उस दिन किसान अपनी फसल काटते हैं। मकर संक्रांति का त्यौहार भारत में मनाया जाने वाला ऐसा त्यौहार है, जो हर साल 14 या 15 जनवरी को ही मनाया जाता है। यह वही दिन है, जब सूर्य उत्तर की ओर बढ़ता है और हिंदू धर्म के अनुसार सूर्य रोशनी, ताकत तथा ज्ञान का प्रतीक होता है।

मकर संक्रांति का त्यौहार अंधेरे से रोशनी की तरफ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह दिन एक नए तरीके से काम शुरू करने का प्रतीक है। मकर सक्रांति के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक पर्यावरण अधिक चैतन्य रहता है यानी कि पर्यावरण में दिव्य जागरूकता होती है और इसलिए जो लोग आध्यात्मिक अभ्यास करते हैं, वे लोग चैतन्य का लाभ उठाते हैं।

इन शहरों में मनाया जाता है मकर सक्रांति का त्यौहार

भारत देश में मकर संक्रांति का त्यौहार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। सक्रांति का त्योहार खासकर पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश इत्यादि में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान की पूजा अर्चना करते हैं और तिल, गुड और दही का सेवन करते हैं। इसके अलावा भगवान को भी तिल, गुड, दही इत्यादि अर्पण करते हैं।

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