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गुजारे भत्ते और तलाक के समान आधार तय करने पर विचार करेगा उच्चतम न्यायालय

गुजारे भत्ते और तलाक के समान आधार तय करने पर विचार करेगा उच्चतम न्यायालय

गुजारे भत्ते और तलाक के समान आधार तय करने पर विचार करेगा उच्चतम न्यायालय

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय सभी धर्मों के लिए तलाक और गुजारे भत्ते के समान आधार तय करने की मांग पर विचार करेगा।

ऐसी मांग करने वाली दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने इससे संबंधित नोटिस जारी किए हैं।

एक याचिका में सभी नागरिकों के लिए तलाक के समान आधार तय करने की मांग की गई है। कहा गया है कि इसमें धर्म, जाति, वर्ण, लिंग, और जन्म स्थान का कोई फर्क नहीं होना चाहिये।

दूसरी याचिका में मांग की गई है कि गृह मंत्रालय ऒर कानून मंत्रालय को आदेश दिया जाये कि वह गुजारे भत्ते के आधारों में व्याप्त विसंगतियों को दूर करे और धर्म, वर्ण, जाति, लिंग और जन्म स्थान के भेदभाव के बगैर सभी नागरिकों के लिए गुजारे भत्ते के समान आधार तय करे।

इस तरह दोनों याचिकाओं में तलाक और गुजारे भत्ते के आधार को जेंडर न्यूट्रल और रिलिजन न्यूट्रल बनाने की मांग की गई है, यानि तलाक और भरण पोषण के मामलों में धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिये।

उच्चतम न्यायालय से नोटिस जारी किए जाने के बाद समान नागरिक संहिता की बहस एक बार फिर तेज हो सकती है । संविधान का अनुच्छेद 44 सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की बात करता है।

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