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कोरोनो रोगियों में डीएनए टेस्ट से न्यूमोनिया बीमारी की पहचान हो सकेगी

नई दिल्ली। कोरोनो रोगियों में डीएनए टेस्ट से न्यूमोनिया बीमारी की पहचान की जा सकेगी।

ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने कोरोनो वायरस से गंभीर रूप से बीमार लोगों में न्यूमोनिया बीमारी की पहचान के लिये एक डीएनए टेस्ट को विकसित किया है। इस तकनीक के जरिये कोरोनो से गंभीर रूप से संक्रमित लोगों में शीघ्रता के साथ न्यूमोनिया का पता लगाया जा सकता है।

ऐसे रोगियों में न्यूमोनिया संक्रमण का दोगुना अधिक खतरा रहता है। कोरोनो से गंभीर रूप से संक्रमित लोगों को वेंटिलेटर पर रखा जाता है और डॉक्टर फेफड़ों में संक्रमण के उपचार के लिये एन्टी इंफ्लेमेटरी थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि ऐसे रोगियों में बैक्टेरिया से दूसरे संक्रमण का भी खतरा रहता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार कोरोनो महामारी के प्रारंभिक दौर में इस बात पर ध्यान दिया गया कि कई कोरोनो रोगियों में दूसरे संक्रमण के तौर पर

खासतौर से न्यूमोनिया का खतरा बढ़ रहा है। इसके बाद एक रैपिड डाइग्नोस्टिक टेस्ट का इस्तेमाल करना शुरू किया गया ।

इस टेस्ट के इस्तेमाल से कोरोनो रोगियों में दूसरे संक्रमण के तौर पर न्यूमोनिया का खतरा अधिक पाया गया।
गौरतलब है कि ऐसे मामलों में न्यूमोनिया की पुष्टि करना चुनौतीपूर्ण काम होता है, क्योंकि रोगी के बैक्टीरिया नमूनों को लैब में विकसित करने की जरूरत पड़ती है।

यह समय लेने वाली प्रक्रिया है। नये टेस्ट में विविध प्रकार के रोगाणुओं के डीएनए का पता लगाने का तरीका अपनाया गया है। जांच की यह तकनीक बेहद तेज और अधिक सटीक है।

कोरोनो रोगियों में डीएनए टेस्ट से न्यूमोनिया बीमारी की पहचान हो सकेगी

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